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जब संवेदनाएं शून्य हो जाती हैं ||||||||||||||||||||||||||
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क्यूंकि यही कुछ उम्मीद है जो अब बंकि हैं तुमसे ..............
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वहां उस कमरे में अब मैं नहीं रहता ।।।।।।।।।
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दाहिने तरफ़ के कमरे में कुछ बदल गया है जैसे।.
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एक और दिन बीत गया शाम के ढले बग़ैर।।।।।।
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