तुम थोड़ी कम हो गयी हो

शायद मैं थोड़ा ज़्यादा हो गया हूँ , या
तुम थोड़ी कम हो गयी हो ।।।।।।।।।
तुम्हारा वक़्त बेवक़्त मुझसे यूं टूट के लिपट जाना
घंटो मेरी बातों में उलझे रहना फिर
कहना कि सुनना अच्छा लगता है तुम्हे।।।
देर तक मेरा इंतेज़ार करना और रूठ कर मेरे लिए जागे रहना
वो चंद दिन थे की....
शायद मैं थोड़ा ज़्यादा हो गया हूँ या
तुम थोड़ी कम हो गयी हो ।।।।
मुझे सुनते सुनते अचानक चुप हो कर तुम्हारा मुश्कुरा देना
मेरी आवाज़ के लिए बेचैन हो कर मुझे आधी रात को जगा देना
मेरे नींद आ जाने पर कहना कि थोड़ा पास आओ न , और
मेरा लिखा हुआ कुछ सुनने की ज़िद पर अड़ जाना
आज कल ये तुम्हारे ज़िद कहीं छिप गए हैं या......
शायद मैं थोड़ा ज़्यादा बो गया हूँ
या तुम थोड़ी कम हो गयी हो ।।।।।।।।।

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