मैं और मुझमें बहस
कल मैं और मुझमें बहस हो गई ।
मैंने मुझसे बोला, तुम इतने उलझे हुए क्यूं हो , और आज कल बेहद चिड़चिड़े , हर बात पर झल्ला जाते ।
नाख़ुश , बदहाल, अजीब से, रंगत इतनी फ़ीकी हो गयी है कि लगता है अचानक बूढ़े हो गए हो ।
मुझमें चिड़चिड़ा पन भरा हुआ था , वो भड़क गया बोला
आख़िर तुम कहना क्या चाहते हो, अरे भई दिखावे की दुनिया में अभिनय कर रहा हूँ ।
दुनिया असलियत नही बस दिखावा चाहती है, कल मेरा एक दोस्त मिला था, बता रहा था, फलां फलां उपलब्धि
हासिल कर ली है उसने ।
उसकी बातों में दोस्ती नहीं थी, घमंड था । मुस्कुराहट नही थी, केवल अट्ठहास था ।
ऐसे में तुम क्या कोई भी क्या उम्मीद करेगा मेरा नकली हो जाना ही बेहतर है ।।
कोई मुझको नहीं सिर्फ़ मेरे उपरिपन को पहचानता है, मेरे नरम लहज़े को, मेरे प्रेम को मेरे आदर्श स्वभाव को ।
और बताओ भला कोई मुझ जैसे ग़ुस्सैल, बेढंगे, नासमझ और अपरिपक्व से क्यों प्रेम करेगा ।
मैं ने कहा हम्ममम्म बात तो सही है ।
मैंने मुझ से फ़िर सवाल किया, तुम अगर नकली हो तो असली क्या है, और ये असली नकली कौन तय करता है।
तुम असल में क्या हो या क्या होना चाहते हो।।
मुझमें एक पिलपिलापन है वो बोला जो अक्सर फ़िसल जाता है , ऐसा नहीं है कि मुझमे ठहराव नहीं है पर इस चक्रऔर द्वंद में
ख़ुद को बदलते बदलते ठीक ठीक याद नहीं पर इस बार थोड़ा गंभीर होकर धीरे धीरे वो बोला तो बात तय हुई ।।।।।।
और बताओ भला कोई मुझ जैसे ग़ुस्सैल, बेढंगे, नासमझ और अपरिपक्व से क्यों प्रेम करेगा ।
मैं ने कहा हम्ममम्म बात तो सही है ।
मैंने मुझ से फ़िर सवाल किया, तुम अगर नकली हो तो असली क्या है, और ये असली नकली कौन तय करता है।
तुम असल में क्या हो या क्या होना चाहते हो।।
मुझमें एक पिलपिलापन है वो बोला जो अक्सर फ़िसल जाता है , ऐसा नहीं है कि मुझमे ठहराव नहीं है पर इस चक्रऔर द्वंद में
ख़ुद को बदलते बदलते ठीक ठीक याद नहीं पर इस बार थोड़ा गंभीर होकर धीरे धीरे वो बोला तो बात तय हुई ।।।।।।
पर बताओ तुम क्या हो ?
मैंने बोला ठोस हूं मैं , मज़बूत मैंने मुझ से बोला देखना इतना मज़बूत हो जाऊंगा एक दिन कि
छोटी-छोटी खुशियों से परे , ये असली नक़ली, से एक दम अलग बेहद गम्भीर, शांत , बिना किसी उम्मीद के, बिना मोह के,
मैंने मुझ से बोलते बोलते अपनी आवज़ इतनी धीमी कर ली मानों वो मुझसे या ख़ुद से भी कुछ छिपाना चाहता हो
।।।।
फ़िर आगे कोई बहस नहीं हुई .... दोनों दूसरी दूसरी तऱफ देखते हुए शांत हो गए।।।।


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