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मैं उसे छू भी न सका

अब थक गयी हूं

बस अच्छी लगती हो

मुझको पूरा खंगाल लेना

वहां उस कमरे में अब मैं नहीं रहता ।।।।।।।।।

मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है

नारी

दाहिने तरफ़ के कमरे में कुछ बदल गया है जैसे।.

मेरे बिस्तर में रह गयी हो ।

एक और दिन बीत गया शाम के ढले बग़ैर।।।।।।

आज आख़िरी शाम ढल गयी।।।