मेरे बिस्तर में रह गयी हो ।
तुम्हारे जाने के बाद भी तुम थोड़ी सी
मेरे बिस्तर में रह गयी हो।.।।।।।।।
वहीं उन सिलवटों में हो , उस पीली चादर में लिपटी हुई
अभी भी तुम अपना चेहरा मुझसे छिपा रही हो।।।।।
उस बैंगनी कम्बल के हर रोएं में हो।।।।
मेरे तकिये से लुढ़क कर मेरे बाहों में अभी भी गिर रही हो।।।।
मैं महसूस कर सकता हूं तुम्हारी गर्म सांसे ,तुम्हारी बदन की खुश्बू
तुम्हारे उथले चिपके बनावट को .....
और तुम्हरे टूटे हुए बाल अब भी पड़े हुवे हैं मेरे तकिये और चादर के आस पास
तुम्हारे खिलखिलाहट से अब भी ये कमरा गूंज रहा है।।।
खिडक़ी का शीशा आधा खुला हुआ अब भी हल्का हल्का हवा समेट कर
मुझमे सिरहन भर से रहा है।।।।
ऐसा लगता है मानो अब भी तुम हो यहीं पर कहीं ।।। जैसे
तुम्हारे जाने के बाद भी तुम थोड़ी सी
मेरे बिस्तर में रह गयी हो ।।।।।
मेरे बिस्तर में रह गयी हो।.।।।।।।।
वहीं उन सिलवटों में हो , उस पीली चादर में लिपटी हुई
अभी भी तुम अपना चेहरा मुझसे छिपा रही हो।।।।।
उस बैंगनी कम्बल के हर रोएं में हो।।।।
मेरे तकिये से लुढ़क कर मेरे बाहों में अभी भी गिर रही हो।।।।
मैं महसूस कर सकता हूं तुम्हारी गर्म सांसे ,तुम्हारी बदन की खुश्बू
तुम्हारे उथले चिपके बनावट को .....
और तुम्हरे टूटे हुए बाल अब भी पड़े हुवे हैं मेरे तकिये और चादर के आस पास
तुम्हारे खिलखिलाहट से अब भी ये कमरा गूंज रहा है।।।
खिडक़ी का शीशा आधा खुला हुआ अब भी हल्का हल्का हवा समेट कर
मुझमे सिरहन भर से रहा है।।।।
ऐसा लगता है मानो अब भी तुम हो यहीं पर कहीं ।।। जैसे
तुम्हारे जाने के बाद भी तुम थोड़ी सी
मेरे बिस्तर में रह गयी हो ।।।।।

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