मुझको पूरा खंगाल लेना

जब तुम आना मेरी जान
मुझको पूरा खंगाल लेना।।।।।

 मेरी छोटी छोटी साँसों को सिल देना
मेरे नंगे पीठ पर अपने नाखून के निशान बनाती जाना ...

उँगलियाँ फेरते फेरते मुश्कुरा कर ......
 मेरे क़रीब से हो कर गुज़र मत जाना , बल्कि मुझमे थोड़ा ठहर जाना।।।

और ठहरना मेरी गर्दन पर जहां पर एक तिल है तुम्हारे लिये।।।
पर शरमा कर छिप मत जाना।।।।।।।

जब तुम आना मेरी जान
मुझको पूरा खंगाल लेना ।।।।

तुम आ कर मेरी चादर में अपनि महक छोड़ जाना
आसमानी दीवारों पर अपने भीगें हाथ के छप्पे बनाती जाना ।।

और मेरे आईने पर अपना चेहरा मढ़ देना की जब भी मैं ख़ुद को देखूँ उसमे तुम भी दिखाई दो ।।।।
जब तुम आना मेरी जान

मुझको पूरा खंगाल लेना ।।।।

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