मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है
मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है जब...
मैं रूठ कर अपनी बचि हुई आख़िरी सिगरेट भी सुलगा लेता हूँ।।
चांद नज़र आता है जब ......
चांदनी की हल्की रौशनी में तुम्हारी दीवार पर बनाई
हुई तस्वीर चमकने लगतीं हैं।।।।।।
जब छिटक कर चांदनी में.. मेरे फर्श पर भी एक चांद
बन जाता है ।।।।
मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है जब......
तकिये पर टेक लगाए , ख़ुद में ही मुस्काये
तुम्हारे यादों के पन्ने अलट पलट करता हूँ।।।।
चांद नज़र आता है .....जब
खिड़की का शीशा सरका कर ठंडी हवा
रूह तक उतार लेना चाहता हूँ ।।।।।।जब
शीशे पर जम रही ओस में तुम्हारा नाम लिखने लगता हूँ।।।।
मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है जब......
मैं तुम्हारी खुली खुली लटों में उलझ कर
सो जाना चाहता हूँ , और तुम कहती हो
मेरे पास भी एक चांद है.... तब
एक बार आंखें खोल कर मैं भी चुपके से
ख़ुद को आसमान पर देख लेता हूँ
तब मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है
मैं रूठ कर अपनी बचि हुई आख़िरी सिगरेट भी सुलगा लेता हूँ।।चांद नज़र आता है जब ......
चांदनी की हल्की रौशनी में तुम्हारी दीवार पर बनाई
हुई तस्वीर चमकने लगतीं हैं।।।।।।
जब छिटक कर चांदनी में.. मेरे फर्श पर भी एक चांद
बन जाता है ।।।।
मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है जब......
तकिये पर टेक लगाए , ख़ुद में ही मुस्काये
तुम्हारे यादों के पन्ने अलट पलट करता हूँ।।।।
चांद नज़र आता है .....जब
खिड़की का शीशा सरका कर ठंडी हवा
रूह तक उतार लेना चाहता हूँ ।।।।।।जब
शीशे पर जम रही ओस में तुम्हारा नाम लिखने लगता हूँ।।।।
मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है जब......
मैं तुम्हारी खुली खुली लटों में उलझ कर
सो जाना चाहता हूँ , और तुम कहती हो
मेरे पास भी एक चांद है.... तब
एक बार आंखें खोल कर मैं भी चुपके से
ख़ुद को आसमान पर देख लेता हूँ
तब मेरे खिड़की से चांद नज़र आता है

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