नारी
बरसो से चलती पौराणिक कथा है
किसी ने ना सोचा ये मेरी व्यथा है
कह़ी कोई कहलाया मर्यादा पुरुषोत्तम
कह़ी कोई कहलाया ज्ञानी सर्वोत्तम
जहां बच ना पायी सीता भी अपवित्रता के दाग से,
गुज़री वो भी परीक्षा की आग से..
तब जा कर उसको राम ने अपनाया था..
फिर भी वो आदर्श पुरुष कहलाया था।।।
एक जोधा को तब भी शान से लाया जाता था
हां फिर किसी अकबर को विजयी बताया जाता था।।
ठीक उसी तरह इस युग में भी एक बेटी को,
बेच दिया जाता है....
यही पुरुसार्थ का सम्मान बताया जाता है।।।
फिर भी वो नारी तुम्हारा संसार बसाती है,
ख़ुद के सपनों को छोड़
ईंट के डब्बे को एक घर बनाती है।।।
किसी ने ना सोचा ये मेरी व्यथा है
कह़ी कोई कहलाया मर्यादा पुरुषोत्तम
कह़ी कोई कहलाया ज्ञानी सर्वोत्तम
जहां बच ना पायी सीता भी अपवित्रता के दाग से,
गुज़री वो भी परीक्षा की आग से..
तब जा कर उसको राम ने अपनाया था..
फिर भी वो आदर्श पुरुष कहलाया था।।।
एक जोधा को तब भी शान से लाया जाता था
हां फिर किसी अकबर को विजयी बताया जाता था।।
ठीक उसी तरह इस युग में भी एक बेटी को,
बेच दिया जाता है....
यही पुरुसार्थ का सम्मान बताया जाता है।।।
फिर भी वो नारी तुम्हारा संसार बसाती है,
ख़ुद के सपनों को छोड़
ईंट के डब्बे को एक घर बनाती है।।।

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