बस अच्छी लगती हो

सुनो ....बस अच्छी लगती हो ।।।।
तुम्हारा सवाल रहता है न मुझमें क्या।।।।

वैसे सच बोलूं तो कुछ ख़ास नही सब आम सी चीज़ें हैं , तुममे
आम से तीखे तेवर, आम सी काजल वाली आंखें

उन आंखों में गहरे ख़्वाब।।।।।।
आम सी आवज़ और उस आवाज़ में ....

हाँफती हुई कुछ टूटते साँसों की खनक ।।।।
आम सी सूरत और उस पर  चढ़ा हुआ चांदी का पानी।।

आम सा लहज़ा और उनका गहरा मतलब ।।।
आम सा तुम्हारा हँसना और धीरे धीरे पिघल कर दिल में उतर जाना ।।।

और आम हैं तुम्हारी बातें जिनमे असलियत रहती हैं ।।।।।
हां आम है बेहद आम उस ख़ास से अलग

सब आम है .... पर फ़िर भी
बस अच्छी लगती हो ।।।।।।

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