तुम्हारी हर अदा

तुम्हारी हर अदा पर बस मेरा हक़ है ।।।।
तुम्हारी हर मुस्कुराहट पर बस मेरा हक़ है।।।
वो जो तुम हर रात कहती हो न तुम आदत हो गए हो।।
फिर हल्के से शरमा कर तुम झेंप जाती हो और धीरे धीरे अपने अल्फाज़ो के उंगलियों से मेरे बाल सहलाती हो उस पूरी रात पर बस मेरा हक़ है।।।।
अपने होठों को मेरे क़रीब ला कर
अपनी साँसों से मेरे बदन की सिरहन बढ़ा कर ,
तुम जो अपनी आहें मुझ पर डाल देती हो ,
बनावटी ग़ुस्से को मुझ उड़ेल कर तुम मुझ पर अपना हक जताती हो ,
उस हक़ पर बस मेरा हक़ है।।।।

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