कुल्हड़ भर चाय

लकड़ी के झोंपड़े में, बांस के फाड़ से बनी बेंच पर
एक कुल्हड़ चाय और अपनी सिगरेट के साथ
मैं हर शाम यहीं बिताता हूं ।।।।।
आधे सफ़ेद दाढ़ी वाला आदमी नया नया बूढ़ा हो रहा है।
उसका लड़का हर बोलने चलाने वाले आदमी से मज़ाक करता है।
चूल्हे के ठीक ऊपर बेंत और खोंपचे से बनी छत काली हो गयी है।
कोने में पुराने अख़बार फाड़ फाड़ के हाथ साफ़ करने के लिए टांग दिये गए हैं ,
सब हर रोज़ की तरह वैसा ही होता है, जैसे हर रोज़ की तरह
मैं हर कश के साथ के कुछ सोचता रहता हूं ,
कभी कोई याद, कभी कोई क़िस्सा तो कभी कोई लोग
और देखो आज अचानक सिगरेट के बड को जूते से मसलते हुए ,
मुझे ध्यान आया...... उसको मेरा सिगरेट पीना पसंद नहीं।।

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