कैसे हो।

एक सवाल हमेशा रह जाता है,
पलकों पर ठहरा हुआ पानी चुपके से बह जाता है।।।।
जब तमाम बातों के बीच, कई रिश्ते-नातों के बीच मैं फ़िर भी अकेला रह जाता हूँ ।।।।।
तब हो सके तो बस नाम को ही सही, सुबह को न हो शाम को ही सही।
मुझे मशीन नहीं इंसान जैसा सोच लिया होता।।।।
काम की बात छोड़ कैसे हो पूछ लिया होता।।
अक्सर जब थका हुआ सा बाहर जाता हूँ, मिल कर कई लोगों से बे-मन के मुस्कराता हूं।।।।।
बेशक़ कुछ लोग मेरी मुस्कुराहट समझ जाते होंगे, हो सकता है, पूछने में झिझक जाते होंगे।।।
पर एक बार तो........ मेरी आंखों में नही मेरी रूह में देख लिया होता।।
काम की बात छोड़ कैसे हो पूछ लिया होता।।।।

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट