काम ही तो है ये.............

घन्टों कुएँ के पास बैठ कर , झाड़ से तिनके चुनते हुए
कांटों पर अपनी उँगलियाँ चुभोते हुए , नारंगी फूल

से सफेद परत हटाते हुए , पानी मे कंकड़ फ़ेंक कर
उस आवाज़ को सुनते हुए, तुम्हे सोचना

काम ही तो है ये.............
तालाब के पास पत्थर के ऊपर पत्थर रखना ,
घाँस की भूरी बालियों को अलग करना ,

पेड़ की सूखी डंठल को एक बराबर करना
पत्तों को टुकड़े टुकड़े करना फिर तुमको याद करते हुए

ज़मीन पर कुरेद कर तुम्हारा नाम लिखना
काम ही तो है ये .................

एक मुट्ठी रेत को हथेली से गिरते हुए देखना ,
लबालब भरे हुए मटके को छलकते देखना ,

खेलती हुई मछलियों को मचलते देखना ,
कबूतर के झुंड को संभलते देखना ,

काम ही तो है ये..........

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