जब संवेदनाएं शून्य हो जाती हैं ||||||||||||||||||||||||||
व्यक्ति थक जाता है , पर चलता रहता है |वो बोलना चाहता है , पर बोल नही सकता ............
वो बदलना चाहता है,पर भाव नहीं बदल पाता ............
जब संवेदनाएं शून्य हो जाती हैं |||||||||||||||
चाय के नुककड़ की बातों को अनसुना कर देता है ........
सड़क के हलचल को अनदेखा कर देता है ........
फाटे हुए नोट को बिना टटोले जेब में डाल लेता है ,
जब संवेदनाएं शून्य हो जाती हैं ||||||||||||||||||||||||||
प्यार बेमतलब लगता है ..
रिश्ते समतल हो जाते है .
ख़ुशी नाटक बन जाती है ..........और
उम्मीद एक शब्द मात्र रह जाता है ,
जब संवेदनाएं शून्य हो जाती हैं ||||||||||||||||||||||||||

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