संदेश

मैं धीरे धीरे तुमसे...............

तुम देखना

तुम

जब तुम आना

काम ही तो है ये.............

सुकून मिलता है

क्यूंकि यही कुछ उम्मीद है जो अब बंकि हैं तुमसे ..............

तुम थोड़ी कम हो गयी हो

वो रात समेटनी हैं

कुल्हड़ भर चाय

मैं और मुझमें बहस