buri nazar wale tera muh kala
बुरी नज़र
वाले तेरा
मुह कला
सड़क पर चलते
वक़्त यदि आपको
किसी ऑटो रिक्सा
के पीछे लिखा
दिख जाय,बुरी
नज़र वाले तेरा
मुह काला तो
मुस्कुराने या भनभनाने
से पहले ज़रा
गौर करें |आखिर
ये चुटकीली पंक्तियाँ
क्यूँ लिखी गयीं
हैं |
और इन पंक्तियों का
क्या मतलब है
|असल में ये
वयंगात्मक पंक्तियाँ शहरी
समाज के एक
तबके को मुह
चिढ़ा रही है
|
ऐसे सैकड़ों चौपाईआं और
शेरो शायरी शहरी
समाज कि सच्चाइयाँ
बयां करती है
|ये पंक्तियाँ कभी
कभी तो बड़ी
गाड़ी वाले लोगों
के मुँह पर
तमाचे जैसी भी
लगती है |
अपनी भड़ास अमीरज़ादों
और उच्च वर्ग
पर निकलने का
ये अंदाज़ केवल
हिंदुस्तान तक ही
सिमित नहीं है,बल्कि पूरे दक्षिण
एशिया में प्रचलित
है |
इन चुटकीले पंक्तियों के
पीछे छिपे मनोविज्ञान
पर सोध भी
किये जा रहे
हैं |इसी मनोरंजक
विषय पर सोध
कर रहे एक
सोध कर्ता एवं
संपादक कहते हैं
,ऑटो रिक्शा के
पीछे लिखी चौपाइयां
एवं शेरो शायरी
वहाँ कि शहरी
लोक संस्कृतियों का
इज़हार करती हैं
|वो कहते हैं
आपको पाकिस्तान में
भी ऑटो के
पीछे लिखा मिलेगा
"'कायदे आज़म ने
फ़रमाया तू चल
मै आया ''|
इन शब्दों का मतलब
निकला जाय तो
पता चलता है,
हर वो चीज़
जो शहरी समाज
का हिस्सा है
वो ऑटो रिक्शा
के पीछे शब्दों
के थोड़े उलट
फेर के रूप
में चिपका हुआ
है |
खैर जो भी
हो पर ऑटो
वाले चालकों का
जीवन सीमा पर
युद्ध लड़ रहे
सैनिक जैसा होता
है |जो वयक्ति,
सड़क , और सरकार
तीनो से लड़ता
रहता है |अगर
तनाव के इन
पलों में ऐसे
लतीफे उन्हें गुदगुदाते
हैं ,तो इसमें
क्या बुरायी है
| अगर कभी चलते
चलते ऐसे लतीफो
पर नज़र पड़
जाये तो मुस्कुरा
कर इनके बारे
में सोचियेगा क्यूंकि
ये महज़ लतीफे
नहीं बल्कि अपने
अंदाज़ बयां करने
का सबसे दिलचस्प
तरीका भी है
|
महताब आलम .....

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