देखते ही देखते ट्रेन आँख से ओझिल होता हुआ धूल में समां गया| वो आखिरी छन तक हाथ हिलाते रहे और मैं भी मुश्कुराते हुए उन्हें सिर्फ देखता रहा| कल मेरे कुछ और दोस्तों ने हमसे विदा ले लिया जिन्होंने हमारे साथ एक लम्बा अर्सा बिताया था| वो सब मेरे सगे नहीं थे पर अक्सर मेरे कमरे मुझे खाने को बुलाने आया करते थे| हर छोटी, बड़ी ख़ुशी में मेरे साथ होते थे| जरूरत पर मेरे पीछे खड़े रहते थे| मेरी गलती होने पर भी मेरे कंधे पर हाथ रख कर कहते थे,जो होगा देख लिया जायगा| ये मेरे दोस्त थे जिन्होंने मुझे बड़ा होते देखा है| ये वही दोस्त हैं जिन्होंने परीक्षा में अपनी कॉपी बढाई और नक़ल कराया| उन्होंने कई बुरी बातें सिखाई पर जाते जाते एक अच्छी बात सिखा गए| उन्होंने कभी कहा नहीं की वो कितना प्यार करते हैं पर जाते समय उनकी आँखों से लगा के वो इतना प्यार करते हैं| सिर्फ गले लगा कर बिना कुछ ज्यादा कहे हम एक दुसरे की आँखों से सामझ गए की वो क्या कहना चाहते हैं| लाल आँखे और लाल सिग्नल ने हमे इससे ज्यादा और इजाजत नहीं दी की हम कुछ और वक़्त बिता पाते|

                                              महताब आलम 

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