थोड़ा हम यहीं हमेशा।।।।।

जब हम चले जायेंगे ।
  फिर भी थोड़ा यहीं रह जायेंगे ।।।
कमरों के बीच फैली खुसबू , किताबों का पुलिंदा, और हमारे ठहाके यहीं रह जाएँगी ।।।।।
 जब हम चले जायेंगे ।
   फिर भी थोडा यहीं रह जायेंगे।।
तब भी रह जाएँगी कसी की बहस किसी का ग़ुस्सा किसी का अपनापन किसी कोने में ।।
 रात की ढ़ेर पर गढ़ी हुई कहानी ,
   और बचे हुए कॉपी के अधलिखे पन्नें, सायद साथ न ले हा सकूँ पर
जब हम चले जायेंगे,
  फिर भी थोड़ा यहीं रह जायेंगे ।।।।  खाली कलम का एक ढ़ेर फ़टे हुए ज़िल्द और बेवज़ह की ख़ाली बोतलें, बहारते हुए अब आँखे नम होने लगती हैं,
  और लगता है , जब हम चले जायेंगे तब रह जाएँगी मेरे पास पुराने वक़्त की याद पुराने दोस्त मेरा कमरा और
फिर रह जायेंगे थोड़ा हम यहीं हमेशा।।।।।

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