बस बादल हूँ...........
आकाश नहीं, न हवा न मेघ न धुवाँ न ओस
बस बादल हूँ मै |
कभी नीली सी कभी स्याह तो कभी उजली
कभी इधर कभी उधर भागती हूँ कभी शांत सी चुप हूँ |
गरजती हूँ, बरसती हूँ रंगीन भी हूँ सादी भी
बस बादल हूँ मै |
कोने में सिमट कर मौसम का पल्लू पकड़े चलती जाती हूँ ,
सूरज को ढँक लेती हूँ , तो चाँद को भी आँचल में छुपा लेती हूँ ,
गर्मी में जलती भी सर्दी में ठिठुरती भी ,फिर भी मुस्काती
बस बादल हूँ मै |
माँ सी ममता लिए वृक्षों सा छांव लिए
तपिस में बारिश बनकर सुबह को नरमी बन कर
मै ही हरियाली हूँ , मै ही गेहूं की बाली हूँ
मै पर्वत पर भी बिछ जाती हूँ
चमक चमक कर थोडा डरती हूँ , पर धरा की प्यास बुझाती हूँ |
सब कहते है वो जैसा पर मै कहती हूँ वो जैसी है |
वो बिल्कुल मुझ सी है थोड़ी चंचल थोड़ी शांत
पल में रंग बदलती थोड़ी सुर्ख थोड़ी लाल
हाँ बस वो मेरी सी ही और
बस बादल हूँ मै |
बस बादल हूँ मै |
कभी नीली सी कभी स्याह तो कभी उजली
कभी इधर कभी उधर भागती हूँ कभी शांत सी चुप हूँ |
गरजती हूँ, बरसती हूँ रंगीन भी हूँ सादी भी
बस बादल हूँ मै |
कोने में सिमट कर मौसम का पल्लू पकड़े चलती जाती हूँ ,
सूरज को ढँक लेती हूँ , तो चाँद को भी आँचल में छुपा लेती हूँ ,
गर्मी में जलती भी सर्दी में ठिठुरती भी ,फिर भी मुस्काती
बस बादल हूँ मै |
माँ सी ममता लिए वृक्षों सा छांव लिए
तपिस में बारिश बनकर सुबह को नरमी बन कर
मै ही हरियाली हूँ , मै ही गेहूं की बाली हूँ
मै पर्वत पर भी बिछ जाती हूँ
चमक चमक कर थोडा डरती हूँ , पर धरा की प्यास बुझाती हूँ |
सब कहते है वो जैसा पर मै कहती हूँ वो जैसी है |
वो बिल्कुल मुझ सी है थोड़ी चंचल थोड़ी शांत
पल में रंग बदलती थोड़ी सुर्ख थोड़ी लाल
हाँ बस वो मेरी सी ही और
बस बादल हूँ मै |

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें