कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल केवल 38 लाख हेक्टेयर है। झारखण्ड राज्य के 79,714
वर्ग किमी क्षेत्र में से 18,423 वर्ग
किमी क्षेत्र में वन हैं। यानि कृषि और कृषि सम्बंधित गतिविधियां झारखण्ड की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं। ये इलाका सब्ज़ी
उत्पादन के कारण...पुरे देश में जाना जाता है...जहां की सब्जियों की पंहुच
बंगाल...बिहार...महाराष्ट्र...दिल्ली तक की रसोई तक में है | कुल मिला कर झारखण्ड
को एक कृषि राज्य कहा जा सकता है | पर आज कल कृषि पर निर्भर ये राज्य अचानक से ठहर
सा गया है| किसान लाचार है, कभी भूमि अधिग्रहण का मुद्दा तो कभी प्राकृतिक आपदा
किसानो की बदतर स्थिति का कारन बन गया है| कुछ किसान ऐसे हैं जिन्होंने खेत किराए पर लिया
था| और वे सब्ज़ी उगा कर ही खेत के मालिकों को पैसा देते थे| यही नहीं किसानों ने
बिज-खाद तक क़र्ज़ से लिया था| अब यह चिंता इन्हें खाई जा रही है,फसल मारे जाने के
बाद...वे उस क़र्ज़ को चुकायेंगे कैसे अब उनका साफ़ कहना है...कि आत्महत्या के
अलावे...उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा | असमय पानी और ओलावृष्टि ने किसानो पर प्रश्न-चिन्ह लगा दिया है | अब ये बेचारे
किसान करें तो क्या | जायें तो जायें कहां जो किसान खुद भूखा रह कर भी दूसरों का पेट भरता हो आज वह क्यों बदहाल है |क्यों
इनकी कोई सुध भी नहीं लेता न कोई पूछने वाला है, और न
ही कोई इनके आंसू पोछने वाला है | सूबे की पूर्ण बहुमत वाली सरकार कब जागेगी | अब
आपके सियासी भाषणों से ज्यादा...मदद की दरकार है | बदलते मौसम ने झारखंड के
लोगों को गर्मी से थोड़ी
राहत तो पंहुचाई लेकिन साथ में
हुए ओलावृष्टि ने तो...सब कुछ बर्बाद कर के रख दिया प्राकृतिक आपदा के मारे सूबे के किसान अब सरकार की तरफ सहयोग
की आस में टकटकी लगाए
देख रहे हैं | जाईयें जाकर उनकीं सुध
लिजीये नहीं तो तो
विदर्भ की तरह झारखण्ड के भी किसान कहीं आत्महत्या न करने लगे | और समय रहते सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो
झारखण्ड में भी किसानों की दुर्दशा की कहानी अख़बारों में लटकती नज़र आएगी |
महताब आलम

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