मजदूर दिवस
आज सुबह चाय पीते पीते मेरी नज़र एक ठेले वाले पर पड़ी बेचारा कितना
मेहनत करता है| दो वक्त की रोटी के लिए सुबह से शाम तक बदन खपाने के बाद भी बदले
में क्या मिलता है| तन ढकने को कपड़ा और दो वक्त की रोटी और वो भी बड़ी मुश्किल से|
सोचते सोचते अन्यास ही मेरी नज़र घडी पर पड़ी सुबह के ९ बजने वाले थे| मेरी नज़र साथ
में मेज़ पर रखे कैलंडर पर पड़ी तो देखा आज दिन है, १ मई आज मजदूर दिवस है| श्रम
दिवस, लेबर डे मैंने दफ्तर पहुचते ही सबसे पहले अपने सहकर्मियों को मजदूर दिवस की
बधाई दी| किसी ने प्रतिउत्त्तर में बढ़ई स्वीकार किया तो किसी ने मुशकुरा कर बात
टाल दिया|कुछ सहकर्मियों ने अजीब सा चेहरा बनाया मानो कह रहें हों साहब हम क्या
मजदूर हैं| जो मजदूर दिवस की सुभकामनाएँ बाँट रहे हो| बात भी सही लगती है की हम
मजदूर है| या अफसर हैं| आखिर मजदूर तो वो हैं तो दिन रात मेहनत करते हैं| सड़कों पर
रिक्शा खीचते हैं| या बोरियां ढोते हैं|
मुझे अचानक से छठे वर्ग की कुछ पंग्तियाँ याद आ गयी जिसमे किसान के मेहनत
का वर्णन किया गया था| मै अक्सर बचपन में किसनों को ही मजदूर समझा करता था| परन्तु
आज मै भी एक मजदूर हूँ| आज मजदूर दिवस है यानी श्रम दिवस असल में हम सब मजदूर है|
हमें सरकार या किसी संस्था या संथान के ज़रिये श्रम मिलता है| जिनके लिए हम मजदूरी
करते हैं| भारत का हर एक इंसान श्रमिक है| परंतु बड़ा दुखदायी है की हम मजदूरी का
नाम उनलोगों से जोड़ कर देखते हैं| जिन्हें वास्तव में उनके काम के एवज में एक
तिहायिवा श्रम ही मिल पाता है| खैर मै अपने सहकर्मियों की मानसिकता या सोच तो नहीं
बदल सकता पर इतना ज़रूर कह सकता हूँ, की मुझे गर्व है की मै एक मजदूर हूँ| एक
श्रमिक हूँ, जो देश के हित में अपना हाथ बंटा रहा हूँ| और मै गर्व के साथ स्वीकार
करता हूँ, की मै एक मजदूर हूँ| और आज का दिन मेरा है| शायद बहुत से लोगों को आज
पाता न चले और अपने काम में व्यस्त हों पर एक बार समय निकाल कर अपने बारे में
सोचियेगा ज़रूर|

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