लोक तंत्र के मेले में मेरी भी कुछ भूमिका है| मैने भी हम सब के लिये कुछ किया, इस बार की सरकार बनाने में मेरा भी हाथ रहा और सब से बढ़ कर ये की अब मै सिर्फ मूक दर्शक नहीं हूँ,बल्कि वो अंग बन गया हूँ, जो अपने हिसाब से मुखिया का चुनाव भी कर सकता है| आज जीवन में पहली बार अपने मत का प्रयोग करने का मेरा अनुभव बेहद सुखद, और रोमांचक रहा, मैंने जिसे अपना मत दिया है,शायद वो देश का प्रधान पद हाशिल न कर सके पर मै संतुस्ट हूँ| क्यूंकि मैंने अपने अधिकार का प्रयोग किया और देश के नये सिरे से गठन में अपनी उपस्थिति दर्ज की है| और अगर सरकार अपने वादों से चूकती है तो अब मै हक से उस पर ऊँगली उठा सकता हूँ|
                                 महताब आलम 

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